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राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने सीएम शिवराज व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम को लिखा पत्र, बोले- विश्व आदिवासी दिवस के दिन ना करें विधानसभा सत्र की शुरूआत

भोपाल। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने विश्व आदिवासी दिवस यानी 9 अगस्त को होने वाले शासकीय अवकाश को रद्द कर दिया है। साथ ही इस अवसर पर कार्यक्रमों के आयोजन के लिए मिलने वाली सहायता राशि पर भी रोक लगा दी है। इतना ही नहीं इसी दिन विधानसभा का सत्र आहूत कर दिया गया है। राज्य सरकार के इस फैसले को लेकर आदिवासी समुदाय में रोष है। मामले पर पूर्व सीएम व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने सीएम शिवराज व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम को पत्र लिखकर विधायक का सत्र टालने की मांग की है।

मुख्यमंत्री व विधानसभा अध्यक्ष को संबोधित पत्र में कांग्रेस नेता ने लिखा है कि, ‘सम्पूर्ण विश्व में 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है। साल 1994 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर अधिकार के साथ-साथ उनकी सामाजिक, आर्थिक और न्यायिक सुरक्षा को लेकर यह दिवस घोषित किया गया था। ताकि आदिवासी समुदाय अपने मूल अधिकारों को लेकर एकजुट हो सकें। इस दिन विश्वभर में जगह-जगह विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं और आदिवासी समाज के लोग अपनी उन्नति के लिये चिंतन-मनन करते हैं।’

कमलनाथ सरकार ने कि थी अवकाश की घोषणा

दिग्विजय सिंह ने आगे लिखा है कि, ‘विश्व दिवस को समारोह पूर्वक मनाने के लिए कमलनाथ सरकार ने साल 2019 में प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। इस मौक़े पर प्रदेश स्तर पर आयोजित शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के 89 आदिवासी विकासखण्डों में 50 हजार रूपये राशि आवंटित की गई थी। लेकिन यह अत्यंत खेद का विषय है कि शिवराज सरकार के आने के बाद न तो इस दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया और न ही समारोह आयोजित किये जाने के लिये राशि आवंटित की गई।’

आदिवासी बहुल राज्य होने के बावजूद समुदाय की अनदेखी – दिग्विजय सिंह

सिंह ने बताया है कि पूरे देश में मध्यप्रदेश ही एक ऐसा राज्य है जहाँ सबसे ज्यादा आदिवासी समाज के लोग रहते हैं। इनकी जनसंख्या प्रदेश की कुल जनसंख्या का 21 प्रतिशत से भी ज्यादा है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि, ‘मध्यप्रदेश विधानसभा का 4 दिवसीय सत्र 9 अगस्त 2021 से शुरू हो रहा है। जो कि आदिवासी दिवस की भावना और सुविधा की दृष्टि से समुदाय की उपेक्षा का प्रतीक है। विधानसभा सत्र के प्रथम दिन होने के कारण मध्यप्रदेश शासन के मंत्री सहित आदिवासी वर्ग के विधायकों को सदन में उपस्थित रहना होगा। ऐसे में में ये जनप्रतिनिधि अपने जिले सहित विधानसभा क्षेत्र में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग नहीं ले सकेंगे।’

कांग्रेस नेता ने सीएम व विधानसभा अध्यक्ष से आदिवासी समाज की भावनाओं के अनुरूप विधानसभा सत्र की तारीख एक दिन के लिये आगे बढ़ाने की मांग की है। बता दें कि मध्यप्रदेश में कुल 47 विधायक आदिवासी समुदाय से आते हैं। साथ ही प्रदेश के 6 लोकसभा व 2 राज्यसभा सांसद भी आदिवासी समुदाय से आते हैं। ऐसे में आदिवासी दिवस का छुट्टी, कार्यक्रमों के लिए मिलने वाले पैसों पर रोक लगाने के बाद अब विधानसभा सत्र के आयोजन से आदिवासी विद्यायकों में रोष व्याप्त है।

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