Narmada Manav

कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ पूरे प्रदेश में अलख जगाने का काम करेंगे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, बीजेपी-आरएसएस को छोड़कर बाक़ी कई संगठनों और विपक्षी दलों से सहयोग मिलने की उम्मीद

भोपाल। देशभर में कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन के बीच कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने बड़ी घोषणा की है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने आज एलान किया कि किसान विरोधी कृषि कानूनों के खिलाफ वे पूरे प्रदेश में किसान महापंचायतों का सिलसिला शुरू करेंगे। ये किसान महापंचायतें पूरी तरह गैर राजनीतिक होंगी और उनका किसी भी दल से कोई लेना-देना नहीं होगा।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि महापंचायतों का सिलसिला 4 मार्च को रतलाम के डेलनपुर गांव से शुरू किया जाएगा। इसके बाद धार में भी उसी दिन महापंचायत होगी। इसके अगले दिन यानी 5 मार्च को बड़नगर और शाजापुर में महापंचायत होगी। जबकि 6 तारीख को सीहोर के श्यामपुर और बैरसिया के शाहपुर में महापंचायत की जाएगी। दिग्विजय सिंह ने बताया कि इसके बाद भी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में किसान महापंचायतों का सिलसिला जारी रखा जाएगा।

दिग्विजय सिंह ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि किसान महापंचायत को लेकर उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से बात की है। साथ ही गैर बीजेपी दलों में समाजवादी पार्टी, बीएसपी, जेडीयू, सीपीआई, सीपीएम, शिवसेना, एनसीपी, आरजेडी समेत कई अन्य दलों के नेताओं से भी उन्होंने बात की है। कांग्रेस नेता ने बताया कि इन सभी दलों ने किसान महापंचायत का समर्थन करने की बात कही है।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कृषि कानूनों के खिलाफ सत्याग्रह कर रहे तमाम संगठनों और आम लोगों से इस किसान महापंचायत से जुड़ने की अपील की है। उन्होंने बताया कि तकरीबन 26 किसान संगठनों ने भी किसान महापंचायतों में शामिल होने की सहमति दी है। दिग्विजय सिंह ने बताया कि इन महापंचायतों में सिर्फ बीजेपी और आरएसएस से जुड़े संगठन ही शामिल नहीं होंगे। 

कांग्रेस नेता ने बताया कि किसान महापंचायतों का मुख्य मकसद किसानों को कृषि कानूनों की वजह से उनके जीवन पर पड़ने वाला खतरनाक असर के बारे में जागरूक करना है। इन महापंचायतों में कोई टेंट या स्टेज नहीं होगा। दो ट्रैक्टरों की ट्रॉली को जोड़कर मंच बनाया जाएगा, जिस पर कोई नेता नहीं बैठेगा। सभी लोग आम किसानों के तरह ही नीचे बैठेंगे। मंच पर न किसी का स्वागत होगा, न फूल माला होगी, न कोई सम्मान दिया जाएगा। मंच पर सिर्फ वही लोग चढ़ेंगे जिन्हें कुछ बोलना हो और संबोधन के बाद वह नीचे उतर जाएंगे।

इस कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी की रामधुन के साथ आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि देकर की जाएगी। दिग्विजय सिंह ने बताया कि लोगों से यह भी अपेक्षा है कि वे बैठने के लिए दरी अपने घर से लेकर आएंगे। सभी लोग दरी पर ही बैठेंगे। कार्यक्रम में खाना भी लोगों को घर से लेकर आना होगा और ज़मीन पर बैठकर सभी लोग वहीं भोजन ग्रहण करेंगे। कार्यक्रम में कोई राजनीतिक झंडा नहीं होगा बल्कि सभी लोग देश का झंडा तिरंगा अपने हाथों में लिए रहेंगे।

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