Narmada Manav

मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता श्री योगेन्द्र सिंह परिहार की कलम से

28 फरवरी पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद श्री दिग्विजय सिंह जी के जन्मदिन पर विशेष।

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद श्री दिग्विजय सिंह जी लगभग 45 साल से राजनीति में सक्रिय हैं और मध्यप्रदेश में कांग्रेस संगठन के शीर्ष और मध्यप्रदेश की सत्ता के शीर्ष पर रह चुके हैं। राजनीतिक क्षेत्र में अनेकों मुकाम पर रहने वाले दिग्विजय सिंह जी का जीवन 3 महत्वूर्ण स्तंभ पर टिका हुआ है, “अनुशासन, संयम और संकल्प”। इन्ही स्तंभों के बलबूते वे आज भी राजनीतिक अखाड़े में अपने पैर मजबूती के साथ जमाये हुए हैं।

श्री दिग्विजय सिंह जी के जीवन का सबसे अहम हिस्सा या यूं कहिए उनकी सफलता का सबसे बड़ा राज यदि कुछ है तो वे है अनुशासन। वे बड़ी कड़ाई से अनुशासन का पालन करते हैं। वे अपने पूरे जीवन से सुबह 4 से साढ़े 4 के बीच सोकर उठ जाते हैं वो भी बिना नागा किए हुए। सफलता का ये मूल मंत्र सभी युवाओं के सीखने के लिए हैं। वे रात्रि में कितने बजे भी विश्राम करने जाएं लेकिन सुबह अपने समय पर ही जाग जाते हैं। सुबह एक-डेढ़ घण्टे नियमित योगा करना उनके जीवन की दिनचर्या का दूसरा अनुशासन का सबसे बड़ा उदाहरण है। उनके चेहरे पर 24 घण्टे चमकती हुई कांति से योगा के प्रभाव का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। उनके अंदर दिन भर दौड़ भाग करने की ऊर्जा योगा से ही आती है जिसका पालन वे पूरे अनुशासन के साथ करते हैं।

श्री दिग्विजय सिंह जी में एक बात और है, वो है “संयम”। संयम यानी धैर्य, ये संयम आप उनके चेहरे के हाव-भाव में आसानी से देख सकते हैं। उनमें किसी भी बात की अधीरता नही रहती। कोई उन्हें कितना भी बुरा-भला कहे लेकिन आनन-फानन में कभी कोई प्रतिक्रिया उनके तरफ से नही आती। कोई उनसे किसी की शिकायत करे तो तुरंत उसपर कार्यावाही नही करते बल्कि शिकायत करने वाले ही अक्सर उनसे डांट ही खाते हैं। कानों सुनी को भी जब तक ठीक से पता नही करवा लेते तब तक उन विषयों पर वे कुछ नही बोलते। पड़ताल करके बोलने के कारण ही उनकी कही गईं बातें देर सबेर सच ही निकलती हैं। यही धैर्य सीखने लायक है, जो हमें अच्छे-बुरे की पहचान करवाता है।

श्री दिग्विजय सिंह जी के जीवन का निचोड़ देखेंगे तो वो “संकल्प” में निहित है। वे पक्के संकल्पवान व्यक्ति हैं, आप उन्हें इस मामले में ज़िद्दी भी कह सकते हैं। 2003 में उन्होंने एक बात कह दी कि यदि कांग्रेस की सरकार नही बनी तो वे 10 साल तक किसी भी लाभ के पद पर नही रहेंगे। जब सरकार नही बनी तो वे अपनी बात पर अड़े रहे और उन्होंने कोई भी पद नही लिया। वे चाहते तो उस वक़्त भी राज्यसभा सांसद बन सकते थे, केंद्र सरकार में मंत्री बन सकते थे। लेकिन बात उनके मन के संकल्प की थी इसीलिए उन्होंने कोई पद नही लिया। आज की राजनीति में अपनी बातों पर अडिग रहने वाले राजनेता देखने को भी नही मिलते। 2017 में श्री दिग्विजय सिंह जी ने अपने वर्षों पुराने “पैदल नर्मदा परिक्रमा” करने के संकल्प को पूरा किया और 6 महीने में 3100 किलोमीटर लंबी नर्मदा जी की पैदल परिक्रमा पूरी की। इतनी लंबी दूरी की पैदल परिक्रमा धर्म में निष्ठा रखने वाला व्यक्ति विशुद्ध संकल्प और ज़िद से ही पूरी कर सकता है।

श्री दिग्विजय सिंह जी ठहाके मार के हंसने वाले अकेले ऐसे नेता हैं जो हमेशा कार्यकर्ताओं की खुशी का कारण बनते हैं। चूंकि वे पूरी तरह से ज़मीन से जुड़े हैं इसीलिए वे कार्यकर्ताओं के नेता कहलाते हैं। लोगों का काम प्रतिबद्धता के साथ करने की शैली उनको अन्य नेताओं से अलग कर देती हैं। लोग उनके बारे में कोई भी धारणा बना सकते हैं लेकिन सिर्फ उनसे भेंट करने से ही पता चलता है कि वे कितने सच्चे गांधी वादी, सर्वधर्म सम्भावी नेता हैं कि जिनके मन में देश के प्रत्येक नागरिकों के लिए एक सा भाव रहता है। एक बार जरूर दिग्विजय सिंह जी से मिलिए वे एक दम भावुक, सहज और मिलनसार व्यक्ति हैं। उन्हें लोग राजा यूं ही नही कहते चूंकि वे लोगों के दिलों में राज करते हैं इसीलिए बाल कवि बैरागी जी ने उनको “दिग्गी राजा” कहकर पुकारा था। सचमुच उन्हें “राजा साहब” कहने का मन करता है। 28 फरवरी को उनके जन्मदिन पर हम उन्हें खूब-खूब बधाई देते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें लंबी आयु और स्वस्थ जीवन प्रदान करें जिससे वे अनेकों वर्षों तक लोगों की अनवरत सेवा करते रहें।

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