Narmada Manav

मुरैना लोकसभा क्षेत्र का चुनावी इतिहास
इस बार मुरैना लोकसभा क्षेत्र से भाजपा ने केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर तथा कांग्रेस ने प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रामनिवास रावत को चुनाव मैदान में उतारा है।बहुजन समाज पार्टी ने पहले यहां से भिण्ड के पूर्व सांसद डॉ रामलखन सिंह कुशवाह को टिकट दिया था बाद में बदलकर हरियाणा के पूर्व मंत्री भड़ाना को दिया गया।इस सीट पर पिछले 23 सालों से भारतीय जनता पार्टी का ही कब्जा है, पिछले 6 चुनावों से जीत दर्ज कराती आ रही बीजेपी ने पहली बार यहां 1989 में जीत हासिल की थी, लेकिन कांग्रेस ने 1991 में हार का बदला लेते हुए इस सीट पर फिर कब्जा जमा लिया था. हालांकि 1996 में फिर इस सीट पर भाजपा को जीत मिली और उसके बाद से अब तक यहां बीजेपी प्रत्याशी ही जीतते आए हैं.
मुरैना लोकसभा क्षेत्र में अधिकतर भारतीय जनता पार्टी का ही राज रहा है. यहां बीजेपी 7 बार तो कांग्रेस 3 बार ही जीत दर्ज करा पाई है. बीहड़ों से घिरा मुरैना कभी पेंच नाम से जाना जाता था, लेकिन बाद में इसका नाम बदल कर मुरैना कर दिया गया. 1967 में अस्तित्व में आई मुरैना लोकसभा सीट पर पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार आत्मदास ने जीत हासिल की थी, इसके बाद 1971 के आम चुनावों में भारतीय जनसंघ के हुकुमचंद ने इस सीट से जीत हासिल की. वहीं 1977 में मुरैना की कमान भारतीय लोकदल के हाथ आ गई. 1980 में पहली बार मुरैना लोकसभा क्षेत्र कांग्रेस के हाथ लगा, जिसके बाद 1984 में भी कांग्रेस ही विजयी रही.

1989 में यहां भाजपा ने पहली बार जीत का स्वाद चखा, लेकिन 1991 में कांग्रेस ने फिर वापसी की और जीत हासिल की. हालांकि 1996 में यह सीट भाजपा के पास वापस आ गई, जिसके बाद से लेकर 2014 तक के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा ही विजयी होती रही है. अब देखने वाली बात यह होगी की 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी यह सिलसिला कायम रख पाने में सफल होती है या कांग्रेस बीजेपी के गढ़ में सेंध लगाने में कामयाब होगी।

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