Narmada Manav

होशंगाबाद। कई अनियमितताओं गड़बड़ियों के बाद भी निलंबित पूर्व जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिवराज पावक की दबंगई जारी है। इतना ही नहीं निलंबित होकर सागर में अटैच हुए शिवराज पावक का होशंगाबाद के ऑफिस में अब भी रोब बरकरार है। यही कारण है कि बिना सक्षम अनुमति नियम विरुद्ध ऑफिस में आकर वर्तमान अधिकारी की कुर्सी पर बैठकर बुधवार को दिनभर काम किया। इस दौरान शहर के कुछ व्यापारियों को भी बुलाया गया। व्यापारियों की परेड ऑफिस में शिवराज पावक के सामने क्यों लगाई गई इसे लेकर खुद व्यापारी भी बताने से डरते रहे। एक व्यापारी ने मीडिया से शिकायत की। जब मीडिया के प्रतिनिधि ने वर्तमान अधिकारी की कुर्सी पर बैठकर काम कर रहे निलंबित अधिकारी से फाइलें खंगालने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि चार्ज देने आया हूं। जबकि निलंबित होने के बाद तत्काल चार्ज लिया जाता है। लेकिन इस मामले में विभाग और प्रशासन के अधिकारियों के वक्तव्य अलग अलग थे। किसी ने इस तरह चुपचाप चार्ज देने के मामले को गलत कहा तो किसी ने विभाग के रिकॉर्ड ज्यादा होने  में टाइम लगने की जानकारी दी। पूरे मामले में सवाल यह उठता है कि निलंबित होने के बाद भी पूर्व अधिकारी के विभाग के मामलों में हस्तक्षेप पर  प्रशासन कार्रवाई में नरमी क्यों बरत रहा है। 
व्यापारियों में डर, कहां मौखिक शिकायत की
कहीं ना कहीं मिलावट में फंसे इन व्यापारियों को जब जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी का ऑफिस बुलाया गया तो निलंबित अधिकारी से चर्चा के बाद वे डरे हुए दिखे। कुछ व्यापारियों ने जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत करने की हिम्मत दिखाई। लेकिन खुद को कहीं ना कहीं मामलों में फंसे होने के कारण शिकायत की कॉपी जेब में रखकर घर चले गए। नाम ना छापने की शर्त पर एक व्यापारी ने कहा की एक अधिकारी को मौखिक शिकायत की है।
यह कहता है नियम
निलंबित होने के बाद संबंधित विभाग के वरिष्ठ या सहायक को तत्काल चार्ज दिया जाता है। किसी कारण लेट होने पर प्रशासन या वरिष्ठ सक्षम अधिकारी के अनुमति पत्र के बाद संबंधित अधिकारी, कर्मचारी ऑफिस में आ सकता है। वही सक्षम अधिकारी के उपस्थित पर अपना प्रभार  दूसरे अधिकारी को सौंप सकता है।
इस मामले में हुए निलंबित
अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करने का आधार बनाकर दिसंबर में शिवराज पावक को निलंबित किया गया था। जिसमें व्यापारियों को डराकर पैसे की वसूली और भ्रष्टाचार की कई शिकायतें सामने है। एक चर्चित मामला लॉक डाउन के दौरान गुटखा पाउच खरीदी और ऑडियो वायरल का था। जिसमें एक खाद्य सुरक्षा विभाग का व्यापारी दलाल गुटखा व्यापारी से कलेक्टर के नाम पर पैसे की मांग कर रहा था। इस मामले में शिवराज पावक और एक अन्य महिला अधिकारी का नाम सामने आया था। मिलावट में मुक्ति अभियान की कार्रवाई से परेशान  व्यापारियों ने जिला बंद का आह्वान किया था।  जिसमें शिवराज पावक को हटाने की पुरजोर मांग की थी। इसमें व्यापारियों ने शिवराज पावक को सबसे भ्रष्ट अधिकारी बताकर कई शिकायतें लिखित में प्रशासनिक अधिकारियों को दी थी। इन्हीं शिकायतों के आधार पर खाद सुरक्षा अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। 
सक्षम अनुमति के सवाल पर अधिकारियों के जवाब
-चार्ज देने आए थे शिवराज पावक। रिकॉर्ड ज्यादा था इसलिए समय लग रहा है। अनुमति है या नहीं आप उन्हीं से पूछ लीजिए।
-ज्योति बंसल, प्रभारी खाद सुरक्षा अधिकारी
-विभाग द्वारा अनुमति देने के सवाल पर कहां की मैं छुट्टी में हूं। इस मामले में बात नहीं करूंगा।
-डॉ दिनेश कौशल मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी 
-निलंबित होने के बाद तत्काल चार्ज दिया जाता है। यदि दो माह बाद बिना सक्षम अनुमति के चार्ज देने की बात है तो यह गलत है।
– मनोज सरेआम, जिला पंचायत सीईओ

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