Narmada Manav

भोपाल/रीवा मप्र।

👉 करोड़ो के कराधान घोटाले में राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह की धमाकेदार कार्यवाही के बाद जागा रीवा का जिला प्रशासन।

👉 रीवा से अब कलेक्टर टी इलैयाराजा द्वारा पंचायतों पर कार्यवाही पर बना दबाब।

👉 7 दिनों में होने वाली जांच में एक साल बाद कागज़ो को गायब करने पर राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने की तल्ख टिप्पणी कहा मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा होने के कारण सूचना आयोग के समक्ष पारदर्शिता का सिद्धांत सर्वोपरि है

👉 अधिकारियों के विरोधाभासी बयान पर सिविल कोर्ट की शक्ति के तहत धारा 18 के तहत इस मामले सभी दस्तावेजों की जांच करेंगे आयुक्त राहुल सिंह

👉 तीन जनपद सीईओ के ऊपर 25 हज़ार प्रत्येक के हिसाब से हुई जुर्माने की कार्यवाही, जारी हुआ कारण बताओ नोटिस

*ऐसे हुआ था घोटाला*

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित 1148 पंचायतों के लगभग 300 करोड़ के वर्ष 2017-18 की कराधान राशि के घोटाले जिसमें की 14वें वित्त आयोग की परफॉर्मेंस ग्रांट की राशि सीधे इन संबंधित संबंधित पंचायतों के सीधे एकल खाते में स्थानांतरित किया गया था जिसके बाद रीवा जिले की लगभग 75 पंचायतों के खाते में पहुंची राशि में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया जिसमें मुख्य रुप से गंगेव जनपद की 38 पंचायतें सम्मिलित थी जो लगभग 12 करोड़ की राशि सीधे शिव शक्ति कंस्ट्रक्शन ट्रेडर्स एवं अन्य के खाते में 2 से 3 दिन के भीतर अंतरित कर दी गई थी जिस पर तत्कालीन रीवा कलेक्टर ओम प्रकाश श्रीवास्तव के द्वारा जांच टीम गठित कर पत्र क्रमांक 2495 एवं 2498 के माध्यम से जांच करवाने के लिए आदेशित किया गया था जिस पर आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी द्वारा आरटीआई लगाकर जानकारी चाही गयी थी जो जानकारी न तो संबंधित लोक सूचना अधिकारी द्वारा दी गई और न ही प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा दी गयी।

*सूचना आयुक्त के समक्ष पहली सुनवाई में ये हुआ*

इसके बाद मामले की अपील एवं धारा 18 के तहत शिकायत मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई जिसकी सुनवाई दिनांक 13 अगस्त 2020 को दोपहर 12:00 से 1:00 के बीच में निर्धारित हुई जिसमें दो लोक सूचना अधिकारी एवं 10 डीम्ड लोक सूचना अधिकारियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित की गई। सुनवाई के दौरान जो जानकारी सामने आई मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने उपस्थित त्योंथर, मऊगंज एवं नईगढ़ी के तीनो जनपदों के लोक सूचना अधिकारियों को दोषमुक्त कर दिया क्योंकि वह कराधान की राशि का उपयोग नहीं किए थे तथा कराधान की राशि जनपदों के पंचायतों में नहीं भेजी गई थी परंतु शेष 6 डीम्ड पीआईओ एवं सीईओ और लोक सूचना अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई जिसमें उपस्थित तीनो डीम्ड लोक सूचना अधिकारी एवं सीईओ जनपद पंचायत सिरमौर सुश्री सुचिता सिंह जिला रीवा जनपद सीईओ हरिश्चंद्र द्विवेदी एवं रायपुर कर्चुलियान जनपद सीईओ प्रदीप द्विवेदी की जिम्मेदारी तय करते हुए प्रत्येक के ऊपर 25000 रुपए जुर्माना लगाने का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

*गोलमोल जबाब पर आयुक्त राहुल सिंह ने धारा 18 के तहत किया सिविल संहिता 1908 की शक्तियों का प्रयोग*

इस मामले में अपीलकर्ता शिवानंद द्वेवेदी ने आयोग के समक्ष अधिकारियों और माफिया के गठजोड़ के चलते घोटाले के कागज़ छुपाने की शिकायत सूचना आयोग में की थी। द्विवेदी की शिकायत पर 13 अगस्त को सुनवाई की गई तो अधिकारियों ने गोल-मोल जंवाब दिया। इससे नाराज़ सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने सख़्त कार्यवाही करते हुए धारा 18 में सिविल सहिंता 1908 के तहत की जांच शुरु कर दी और अधिकारियों से मय दस्तावेजों बिंदुवार जवाब तलब किया है।

अब इस मामले की सुनवाई 17 और 19 अगस्त को की जाएगी। पूरी कार्यवाही व्हाट्सएप के माध्यम से की जा रही है।

*तीन सीईओ को 25 हज़ार जुर्माने की नोटिस, 4 अन्य की सुनवाई 17 को*

रीवा के तीन सीईओ जनपद पंचायत को पच्चीस-पच्चीस हजार रुपये जुर्माने को नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा 4 अन्य सीईओ जनपद पंचायत जबलपुर, रायसेन, और रीवा की सुनवाई सोमवार को होगी। सुनवाई के बाद ये तय किया जाएगा कि इन प्रत्येक अधिकारियों पर भी रुपये 25 हज़ार जुर्माने की कार्यवाही होगी या नहीं।

सबके चौकानें वाला तथ्य ये है कि करोड़ो के इस घोटाले के उज़ागर होने के बाद महज़ 7 दिन में जांच के आदेश तत्कालीन रीवा कलेक्टर ओ पी श्रीवास्तव ने दिए थे। पर जांच कागज़ो से बाहर कभी आ ही नही पाई। उल्टे भ्रष्ट अधिकारियों ने लीपा-पोती कर मामले को दबा दिया।

*7 दिन की जांच को साल भर लटकाना सिविल सेवा अधिनियम की अवहेलना – सूचना आयुक्त राहुल सिंह*

गौरतलब है कि 7 दिनों में होने वाली जांच में गोल मोल जवाब पर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने तल्ख़ टिपण्णी की है। सिंह ने कहा है कि “आयोग के समक्ष इस तथ्य के सामने आने साफ़ है जो जांच रीवा के तत्कालीन कलेक्टर श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने 7 दिन में में पूरी करके देने को कहा था वो आदेश संबंधित विभागों में धूल खाती रही। घोटाले की जाँच आदेशित समय सीमा में करवाने के लिए अधिकारी सिविल सेवा नियम से बंधे हुए है।”

*अधिकारी कानून को धता बताकर मनमानी जांच कर रहे लेकिन आयोग की शक्ति की वह सूचना दिलवाए – राहुल सिंह*

श्री सिंह ने आगे ज़िम्मेदार अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि “आयोग के समक्ष ये स्पष्ट है कि 7 दिनों की जांच को सालों तक चलना पूरी तरह से सक्षम अधिकारी के अधिकार क्षेत्र का विषय है। पर जांच से संबंधित समस्त दस्तावेज़ एवं अधिनियम के तहत आवेदक को सही जानकारी उपलब्ध कराना सूचना आयोग के अधिकार क्षेत्र में है। और संविधान ने इस देश के नागरिको को ये अधिकार दिया है ये जानने का की उनकी गाढ़ी कमाई का पैसा कैसे किस घोटाले की भेंट चढ़ गया।”

*सूचना आयोग के समक्ष पारदर्शिता का सिद्धांत सर्वोपरि – राहुल सिंह*

सूचना आयुक्त ने अपने आदेश में जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठा दिए उन्होंने कहा कि “मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा होने के कारण, सूचना आयोग के समक्ष पारदर्शिता का सिद्धांत सर्वोपरि है। यह एक ऐसा मामला है जहां दस्तावेजों के अध्ययन से यह स्पष्ट है की करोड़ो का कराधान घोटाला बड़े पैमाने पर समस्त नियम कानून व्यवस्थाओं को ताक पर रखकर अंजाम दिया गया है। घोटाले में जांच के 7 दिन के आदेश के बावजूद लगभग 1 साल बाद भी इस प्रकरण में जांच नहीं होने से पूरी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में है।”

*पहली बार जब 9 अधिकारी एक साथ लपेटे में*

ये पहली बार है सूचना आयोग के इतिहास में इतने बड़े पैमाने पर एक ही मामले 9 अधिकारी एक साथ जांच के लपेटे में हो। आने वाले समय में अन्य अधिकारियों की भूमिका भी इस मे तय होगी। अपीलकर्ता शिवानंद द्वेवेदी इस पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है क्योंकि उनका कहना है कि राज्य स्तर पर हुए इस घोटाले की जानकारी अधिकारियों द्वारा दबाई जा रही है।

*सबकी मिलीभगत से रोकी गयी थी कार्यवाही तत्काल वसूली कर एफआईआर दर्ज हो – शिवानन्द द्विवेदी*

पूरे मप्र की 1148 पंचायतों पर 300 करोड़ के घोटाले पर आवाज उठाने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी ने कहा कि रीवा जिले की 75 पंचायतों की कराधान घोटाले की जांच को दबाने में प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक लोगों की बराबर की भूमिका रही है। एक्टिविस्ट ने कहा कि जब सितंबर 2019 को तत्कालीन कलेक्टर रीवा ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने जांच संस्थित की थी तो फिर क्यों जांच पूरी नहीं कराई गई और फिर क्यों जांच को किन लोगों द्वारा दबा कर रखा गया। इसके पीछे सभी की मिलीभगत थी जिससे घोटाले की फ़ाइल को हमेशा के लिए ही दफन कर दिया जाय।

*बड़ा सवाल ये भी है कि एक साल पहले इस प्रकरण में राज्य स्तरीय घोटाले की जांच की माँग एसीएस मनोज श्रीवास्तव से करने के बाद भी घोटाले पर्दा और दोषियों को बचाने की करवाई जारी है। सूचना आयोग ने भी भेजी थी मानों श्रीवास्तव को जांच की शिकायत का आवेदन*

एक्टिविस्ट द्विवेदी ने कहा है कि कमिश्नर रीवा संभाग के आदेश के अनुसार तत्काल रीवा कलेक्टर को सभी दोषी सरपंच सचिवों के ऊपर धारा 40-92 के तहत कार्यवाही करते हुए भारतीय दंड संहिता के विधान के अनुरूप 409/420 की कार्यवाही कर एफआईआर दर्ज कराई जानी चाहिए। एवं गंगेव में लिपिक रहे राजेश सोनी और उसके संपर्क के शिवशक्ति ट्रेडर्स वेंडर पर भी कार्यवाही करते हुए एफआईआर दर्ज कर बर्खास्त करना चाहिए।

*सिविल कोर्ट की शक्ति का प्रयोग कर आयोग ने धारा 18 के तहत मागा यह जबाब*

सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 18 के तहत सूचना आयुक्त को सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के 5 के तहत सिविल जज की शक्ति प्राप्त है। इस नाते सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने जनपद पंचायत सीईओ जवा, रीवा, हनुमना, सिरमौर, रायपुर कर्चुलियान को धारा 18 के तहत कार्यवाही करते हुए लिखा है कि तत्कालीन जिला कलेक्टर रीवा श्री ओम प्रकाश श्रीवास्तव द्वारा जारी पत्र क्रमांक 2495 एवं 2498 पर हुई समस्त जांच एवं कार्यवाही का विवरण मांगा है। साथ ही यदि कार्यवाही नही हुई तो क्यों नही हुई उसका लिखित विवरण। सीईओ जिला पंचायत रीवा द्वारा डीम्ड पिआईओ की हैशियत से समस्त 6 जनपद सीईओ को जारी विभिन्न पत्रों पर क्रमवार क्या कार्यवाही की गई इसका भी विवरण आयुक्त श्री सिंह ने लिखित तौर पर मांगा है। साथ मे इन समस्त की गई कार्यवाही की जानकारी आयुक्त श्री राहुल सिंह ने पीडीएफ एवं इलेक्ट्रॉनिक फॉरमेट में दिनाँक 19 अगस्त 2020 तक अगली सुनवाई के पहले तक देने को कहा है।

*कब होगी अब अगली सुनवाई*

रीवा जिले की 75 पंचायतों में हुए कराधान घोटाले की जांच प्रतिवेदन और जुड़े हुए दस्तावेजों को लेकर अगली दो सुनवाइयां रखी गयी हैं जिनमे 17 एवं 19 अगस्त को एकबार फिर व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से पेशी रखी गयी है।

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