Narmada Manav

होशंगाबाद। गांवों में नरवाई और पशुओं के अपशिष्ट से भी अब किसानाें काे आमदानी बढ़ाने का मौका मिलेगा। मिसराेद क्षेत्र के किसान फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) बनाकर कचरे और नरवाई के उपयाेग के लिए बायोगैस संयंत्र लगाकर समुचित उपयोग कर लाभ कमाएंगे।

क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए किसानाें ने फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन बनाया है। संभवत: यह एफपीओ जिले का पहला संगठन है, जो किसानों की आमदनी के लिए काम करेगा। किसान फसल की नरवाई और पशुपालन और गोबर से बायोगैस संयंत्र लगाने का काम करेंगे। इससे ग्रामीण पशुधन से प्राप्त होने वाले कचरे से बायोगैस प्लांट लगाकर ऊर्जा निर्माण कर सकेंगे और खाद भी बनेगी। एफपीओ से जुड़े किसान मनाेज गाैर ने बताया बायोगैस उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे पदार्थ गांवों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है और इससे प्रदूषण भी नहीं होता है। इससे निकलने वाला खाद भी फसलों की उपज बढ़ाने के काम में आता हैं।

मिसराेद में खुला कार्यालय, किसानाें काे दी जानकारी
डोलरिया के मिसरोद में रविवार को कंपनी कार्यालय का शुभारंभ हुआ। कंपनी दहेड़ी गांव में बायो सीएनजी एवं जैविक खाद के उत्पादन के लिए प्लांट स्थापित करेगी। कार्यक्रम के दौरान डॉ. अरुण चौधरी, डीन कृषि महाविद्यालय पवारखेड़ा सुधीर गौर, एनपी चिमानिया, संस्कार पटेल, डॉ. ओम प्रकाश गौर विकास गौर, एमएल गौर, नीलेश गौर, मनोज गौर, विनय गौर उपस्थित रहे।

कचरा 1 रु. किलाे खरीदेंगे
एफपीओ किसानों से एक रुपए किलो में कचरा खरीदेगी। इसमें नरवाई, पशुओं का कचरा और नेपियर घास शामिल है। इसकाे खरीदने के लिए पंचायत स्तर पर कलेक्शन सेंटर बनाने की याेजना है।

संयंत्र के लिए यह जरूरी
बायाे गैस संयंत्र लगाने के लिए गोबर की व्यवस्था प्रतिदिन हो। नरवाई भी प्रचुर मात्रा में मिलना चाहिए। ग्राम देहड़ी में 10 एकड़ में यह संयत्र लगाने का काम हाे रहा है।

दुग्ध उत्पादन बढ़ाने नेपियर घास का प्लान
एफपीओ से जुड़े किसानाें काे दुग्ध उत्पादन काे बढ़ावा देने के लिए नेपियर घास भी एक एकड़ में लगवाने की याेजना है। दुधारू पशुओं के लिए हरा चारा सबसे उपयुक्त माना जाता है। किसान बरसात में मवेशियों को उपलब्ध करा पाते हैं। गर्मियों में चारा नहीं मिलता है। नेपियर घास गर्मियों के मौसम में भी हरी रहती है। इसे खाने से दुधारू पशु 10 से 15% अधिक दूध देने लगते हैं।

यह है नेपियर घास
नेपियर घास बाजरा की हाईब्रिड वैराइटी है। जो कि न केवल बंजर जमीन बल्कि खेतों की मेड़ों पर उगाई जा सकती है। केवल सिंचित करने की आवश्यकता है। नेपियर घास की रोपाई करने का यही सही समय है। यह घास बीस से पच्चीस दिन में तैयार हो जाती है। नेपियर घास का उत्पादन प्रति एकड़ लगभग 300 से 400 क्विंटल होता है। एक बार घास की कटाई करने के बाद उसकी शाखाएं पुनः फैलने लगती है।

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