Narmada Manav


  • एम्स में हुए प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने जताई एंटी बायोटिक के जबरन उपयोग पर चिंता 
  • 29 अप्रैल को एंटी बायोटिक दवाओं का सीमित उपयोग करने एक्शन प्लान बनाने पर होगी चर्चा 
  • विशेषज्ञों ने डॉक्टरों को बताया, कब, कितनी मात्रा में मरीजों को लिखे एंटी बायोटिक

भोपाल। 

वायरल बुखार में मरीजों को एंटी बायोटिक देने की जरूरत नहीं होती है। फिर भी मप्र में कुछ डॉक्टर एंटी बायोटिक का डोज लिख रहे हैं, जो मरीजों की जान के लिए खतरा है। एंटी बायोटिक का उपयोग तत्काल रोकना होगा। यह चिंता अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मंगलवार को जताई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल व एम्स के सहयोग से एक प्रशिक्षण रखा गया था। इसमें भोपाल संभाग के आठ जिलों के 100 से अधिक डॉक्टरों को बुलाया था। डॉक्टरों को बताया गया कि किस बीमारी में कौनसी व कितनी मात्रा में एंटी बायोटिक लिखी जानी चाहिए। प्रशिक्षण में ये बातें भी सामने आई कि कुछ डॉक्टर जरूरत नहीं होने पर भी मरीजों को एंटी बायोटिक दे रहे हैं। इसे रोकने के लिए स्टेट एक्शन प्लान बनाया जाएगा। इसको लेकर 29 अप्रैल को बैठक बुलाई है। 

प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मप्र के संयुक्त संचालक डॉ. पंकज शुक्ला ने जिलों से आए डॉक्टरों को बताया कि बुखार के 80 फीसदी केस वायरल के होते हैं। इनमें मरीजों को एंटी बायोटिक देने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं होती। फिर भी लिखी जा रही है, जो चिंता का विषय है क्योंकि एंटी बायोटिक देने से शरीर को कई तरह से नुकसान होता है। बाद में इंफेक्शन होने पर एंटी बायोटिक असर नहीं करती। ये गैर जरूरी एंटी बायोटिक शरीर के अंदर जरूरी बैक्टिरिया को नष्ट करते हैं। ऐसा होने से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। एम्स के डायरेक्टर प्रोफेसर सरमन सिंह ने डॉक्टरों को साधारण बीमारियों में अनावश्यक एंटी बायोटिक का डोज लिखने से बचने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि मरीज को बार-बार एंटी बायोटिक लिखने से उसके शरीर पर बाद में कोई भी एंटी बायोटिक असर नहीं करती। गंभीर बीमारी की स्थिति में ऐसे मरीज को जान का खतरा भी हो सकता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अन्य विशेषज्ञों ने भी एंटी बायोटिक दवाओं के बेजा उपयोग पर चिंता जताई है। 

केरल राज्य का उदाहरण देकर डॉक्टरों को समझाया 

डॉ. पंकज शुक्ला ने डॉक्टरों को केरल राज्य का एक उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि एक मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट किया था, जो सफल रहा था। बाद में उसे इंफेक्शन हो गया। ठीक करने के लिए उक्त मरीज को एंटी बायोटिक दी गईं। लेकिन एक भी एंटी बायोटिक ने असर नहीं किया और मरीज की मौत हो गई। बाद में पता चला कि उसे पूर्व में गैर जरूरी एंटी बायोटिक दी गई थी। 

सही उपयोग के लिए बनेगा स्टेट एंटी बायोटिक एक्शन प्लान 

प्रदेश के निजी व शासकीय अस्पतालों में मरीजों को सही समय पर सही एंटी बायोटिक लिखी जाए, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग स्टेट एक्शन प्लान बनाने जा रहा है। इसकी पहली बैठक 29 अप्रैल को संचालनालय में बुलाई है। इसमें दवा विक्रेता संघ, पशु पालन विभाग, कृषि विभाग, खाद्य एवं औषधी विभाग के अधिकारियों को बुलाया गया है। बता दें कि केरल में एक्शन प्लान के तहत मरीजों को एंटी बायोटिक लिखी जा रही हैं। एक्शन प्लान के आधार पर ही केरल में मरीजों को एंटी बायोटिक लिखी जाती हैं। मप्र भी ऐसा करने जा रहा है।

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