Narmada Manav
“नेट युग मे इंदौर में ई उठावना” “ई शोक बैठक” की हुई शुरुआत… इंदौर। आज की आधुनिक दुनिया मे इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के बीच इंदौर में एक अनूठी शुरुआत हुई है, वह है, ई उठावना” “ई शोक बैठक”। यह अभिनव शुरुआत की है दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश जी याग्निक के छोटे भाई नीरज याग्निक ने। आज फेसबुक पर अपने अकाउंट पर इसकी जानकारी देते हुए नीरज याग्निक ने जो लिखा है, वह इस प्रकार है…-
वर्ष भर में परिवार में दो उठावने करने के पश्चात निर्णय लिया है कि अब परिवार में कोई गमी होने पर उठावने जैसी कोई रस्म न करते हुए हमारा परिवार अब “ई उठावना” व “ई शोक बैठक” करेगा। हमें भीड़ भाड़ से भरे रास्तों पर निश्चित समय पर पहुंचना होता है। वहां पहुंच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने हेतु चेहरे को गंभीर बनाना होता है…. आदि आदि। उठावने को लेकर काफी कुछ लिखा जा सकता है व लिखा जा चुका है। समय, पेट्रोल, पर्यावरण जैसे अनेक फायदे व ई शोक संदेश से उपस्थिति निश्चित तौर पर दर्ज होगी क्योंकि उठावने व बैठक में सभी की उपस्थिति याद रख पाना संभव नहीं। जीजाजी के निधन की “ई शोक बैठक” की शुरुआत आज शाम करने जा रहा हूं, ऐसा शायद पहला अवसर हो। कुछ इसे मजाक में ले सकते हैं तो कुछ गुस्से में। किन्तु मैं इस विषय को गंभीरता से ले रहा हूं। और हां… एक लिंक भी शेयर करुंगा जिसमें कैसे और क्यों हो गया… यह सब होगा। ताकि बार बार एक ही बात बताने से भी बचा जा सके।

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